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हरिद्वार,


हरिद्वार के देवसंस्कृति विश्वविद्यालय में ‘लोकतंत्र के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता’ विषय पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन का शुभारंभ डॉ. चिन्मय पण्ड्या सहित देश-विदेश से पहुंचे कृत्रिम बुद्धिमत्ता विशेषज्ञों ने दीप प्रज्वलित कर किया।

कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता के बढ़ते प्रभाव, संभावनाओं, चुनौतियों और इसके जिम्मेदार उपयोग को लेकर विस्तार से मंथन किया।

सम्मेलन के अध्यक्ष और देवसंस्कृति विश्वविद्यालय के उपाध्यक्ष डॉ. चिन्मय पण्ड्या ने कहा कि भारत की ज्ञान परंपरा तकनीकी विकास को हमेशा मानव कल्याण से जोड़कर देखती रही है।

उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता को मानव बुद्धि का विकल्प नहीं, बल्कि मानव क्षमताओं के विस्तार का माध्यम बनाया जाना चाहिए।

मानवीय मूल्यों से जुड़ी कृत्रिम बुद्धिमत्ता ही लोकतंत्र को अधिक संवेदनशील, समावेशी और जनकेंद्रित बना सकती है।

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