हरिद्वार,


हरिद्वार स्थित भारत माता मंदिर में चल रहे ब्रह्मलीन पद्मभूषण स्वामी सत्यमित्रानंद गिरि महाराज के तीन दिवसीय समाधि एवं मूर्ति स्थापना महोत्सव का दूसरा दिन श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर रहा। कार्यक्रम में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, योगगुरु बाबा रामदेव, बिहार के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान, जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा, मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह डॉ. कृष्ण गोपाल, विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार सहित अनेक संत-महात्मा, धर्माचार्य और राजनीतिक हस्तियों ने शिरकत की। विशिष्ट अतिथियों की उपस्थिति से समारोह की गरिमा और भव्यता और अधिक बढ़ गई। मंदिर परिसर पूरे दिन ‘भारत माता की जय’ और गुरुदेव के जयघोष से गूंजता रहा। तीन दिवसीय आयोजन को देखते हुए हरिद्वार प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड में है। सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम किए गए हैं, मंदिर क्षेत्र में पुलिस बल की अतिरिक्त तैनाती की गई है और हर गतिविधि पर प्रशासन की पैनी नजर बनी हुई है, ताकि श्रद्धालुओं और अतिथियों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।

योगगुरु स्वामी रामदेव ने गुरुदेव स्वामी सत्यमित्रानंद गिरि महाराज की प्रतिमा के समक्ष नमन करते हुए उन्हें राष्ट्र की सांस्कृतिक चेतना का महान स्तंभ बताया। उन्होंने कहा कि स्वामी जी ने धर्म को राष्ट्रवाद से जोड़ा और भारत माता मंदिर के माध्यम से अखंड भारत की भावना को जन-जन तक पहुंचाया। बाबा रामदेव ने कहा कि गुरुदेव का जीवन त्याग, तप और राष्ट्रभक्ति का प्रतीक था, और उनकी समाधि व मूर्ति स्थापना आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का केंद्र बनेगी।

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि स्वामी सत्यमित्रानंद गिरि महाराज का संपूर्ण जीवन राष्ट्र, संस्कृति और सनातन मूल्यों के संरक्षण के लिए समर्पित रहा। उन्होंने कहा कि भारत माता मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि राष्ट्रीय एकता का प्रतीक है। मुख्यमंत्री ने कहा कि गुरुदेव के आदर्शों से प्रेरणा लेकर राज्य सरकार उत्तराखंड को देश का श्रेष्ठ राज्य बनाने की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है और विकसित भारत के संकल्प को साकार करने में आध्यात्मिक चेतना की अहम भूमिका है।

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने श्रद्धा सुमन अर्पित करते हुए कहा कि स्वामी सत्यमित्रानंद गिरि महाराज ने देश को सांस्कृतिक आत्मबोध दिया। उन्होंने कहा कि गुरुदेव ने भारत माता को केंद्र में रखकर राष्ट्र को एक सूत्र में बांधने का जो कार्य किया, वह अतुलनीय है। डॉ. मोहन यादव ने कहा कि इस प्रकार के आयोजन समाज को अपनी जड़ों से जोड़ने और राष्ट्रप्रेम को मजबूत करने का कार्य करते हैं।


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