हरिद्वार,
‘कागजी जादूगर’ इरफ़ान की अमर प्रेम कहानी: एक जमीन, दो लोन और तीसरा पट्टा!
तहसील लक्सर के ग्राम सुल्तानपुर में एक परम प्रतापी भू-स्वामी रहते हैं—इरफ़ान (पुत्र शरीफ अहमद)। उन्होंने साल 2008 में अपनी खसरा संख्या 3/1/3 मि० (रकबा 1.123 हेक्टेयर) पर विभिन्न बैंकों से ₹7,20,000 का कृषि ऋण लिया (p. 1)। ऋण लेने के बाद उन्हें लगा कि बैंक वालों को ज्यादा दिनों तक इंतज़ार नहीं कराना चाहिए, इसलिए उन्होंने 05.05.2009 को बिना बैंक का लोन चुकाए, वह जमीन अमल वर्मा नाम के एक भले मानस को बेच दी।
अब चूंकि लोन चुकाया नहीं गया था, तो सरकारी कागजों (दाखिल- खारिज) में नाम बदलने की जहमत राजस्व विभाग ने उठाई ही नहीं । नाम पुराना ही चलता रहा। सरकारी बाबू भी सोचे कि जब नाम बदलने में इतनी मेहनत है, तो इसे इरफ़ान भाई के ही नाम रहने दो।
इस आलस का फायदा उठाकर इरफ़ान ने साल 2016 में उसी बिक चुकी जमीन पर दोबारा ₹2,55,000 का एक और कृषि ऋण निकाल लिया । इसे कहते हैं “एक तीर से दो नहीं, बल्कि दो नहीं तीन लोन के शिकार!”
गंगा मैया की छाती पर ‘River Dredging’ का वीआईपी पास
कहानी यहीं खत्म नहीं होती। असली ट्विस्ट तब आता है जब इस खेल में “मैसर्स अर्थ इंडिया ग्लोबल” (प्रोफेसर चिराग त्यागी, ग्राम भिक्कमपुर जीतपुर) की एंट्री होती है (p. 1)। River Dredging Policy 2021 के तहत इस सूखी कागजी जमीन पर उपखनिज (रेत-बजरी) निकालने का पट्टा स्वीकृत हो जाता है ।
संबंधित विभाग की अपनी ही रिपोर्ट कहती है कि यह जमीन गंगा नदी क्षेत्र के अंदर आती है । अब यह शोध का विषय है कि: अगर जमीन नदी के बीच में है, तो बैंक के अधिकारियों ने पानी के अंदर तैरकर ‘कृषि लोन’ कैसे दे दिया? क्या वहां पानी के अंदर सिंघाड़े की खेती हो रही थी?
बिना मालिकाना हक (स्वामित्व स्थिति) साफ किए, खनन विभाग ने नदी में पट्टा कैसे बांट दिया?गणित के नियमों को मात देता ‘सरकारी फीता’
इस घोटाले में अल्बर्ट आइंस्टीन के गणित को भी फेल कर दिया गया है। असल कागजों में जमीन का कुल रकबा 1.123 हेक्टेयर है। लेकिन जब हमारे काबिल राजस्व, खनन और सिंचाई विभाग के बाबुओं ने फीता घुमाया, तो जादुई रूप से पट्टा 1.137 हेक्टेयर पर स्वीकृत हो गया ! यानी 0.014 हेक्टेयर अतिरिक्त जमीन सरकारी फाइलों के किसी गुप्त कोने से पैदा कर दी गई।
‘तारीख पे तारीख’ और फाइलों का मौन व्रत
शिकायतकर्ता पत्रकार संदीप उपाध्याय (निवासी: गणेशपुरम, जगजीतपुर) ने दिनांक 28/04/2026 को ही इसकी पूरी कुंडली बनाकर प्रथम, उप जिलाधिकारी (लक्सर), जिला खनन अधिकारी और बाद में दिनांक 07/05/26 को ज़िला अधिकारी एवम् मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत विधिक कार्यवाही को सौंप दे थी।
शिकायत हुए कई दिन बीत चुके हैं, खनन विभाग और लक्सर एडीएम के विभागों में ऐसी ‘गहरी शांति’ है जैसे अधिकारी गंगा किनारे ध्यान में लीन हों। शायद वे इस बात का इंतजार कर रहे हैं कि कब अगली बाढ़ आए और सारे सबूत अपने साथ बहाकर ले जाए।
मांगी गई मुख्य कार्रवाइयां (जो फाइलों में धूल फांक रही हैं:
इस अद्भुत ‘जल-कृषि-खनन’ घोटाले की उच्च स्तरीय जांच हो ।
जादुई पट्टे को तत्काल प्रभाव से निरस्त (Cancel) किया जाए ।
दोषी अधिकारियों, बैंक मैनेजरों और भू-माफियाओं के खिलाफ FIR दर्ज हो ।
जनता आस लगाए बैठी है कि कब इन ‘कागजी जादूगरों’ की लाठी टूटेगी और जवाबदेही का राज आएगा । तब तक, लक्सर में गंगा मैया भी सोच रही होंगी कि उनके पानी पर कितने लोग अपनी तिजोरियां भर रहे हैं!
